अंक ज्योतिष में 3 मूलांक का विशेष महत्व होता है. जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है तो उनका मूलांक 3 होगा. मूलांक 3 का स्वामी ग्रह बृहस्पति है, जो सभी ग्रहों के गुरु हैं. मूलांक 3 के लोग बहुत स्वाभिमानी होते हैं. इन लोगों…
नमस्कार आज हम आपके साथ इस Video में Jyothi Reddy नामक महिला की Real Life Story बताने जा रहे है जिसमे कैसे एक जूझारू महिला ने आंध्र प्रदेश के छोटे से गावं मे जन्म लेकर 5 Rupees की मजदूरी से शुरू करके $5 million टर्नओवर की कंपनी तक का सफर किया | ज्योति रेड्डी ने…
कर्क राशि के लिए नया साल 2024 नए जीवन की शुरुआत लेकर आया है, जिसमें आपको कई उपलब्धियां प्राप्त होंगी और मान सम्मान बढ़ेगा. कारोबार में अचानक वृद्धि देखने को मिलेगी. इस वर्ष भाग्य आपका साथ देगा. अध्यात्म की तरफ आपका रुझान बढ़ेगा. जो लोग विदेश जाकर जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, उन्हें इस वर्ष…
ग्रह वह विशाल खगोलीय पिंड होते हैं जो अंतरिक्ष में पृथ्वी के साथ-साथ अपनी धुरी पर स्थिर रहकर गतिमान होते हैं। यह आकार में धरती के बराबर या उससे कई गुना बड़े भी हो सकते हैं। अंतरिक्ष में पृथ्वी के समान कई ग्रह मौजूद होते हैं परंतु उनका वातावरण पृथ्वी से भिन्न होता है। सभी…
कर्क राशि वाले जातकों का स्वामी चंद्रमा होता है, राशि चक्र का चौथा चिन्ह है। इसकी वजह से इनका स्वभाव भी चंद्र की तरह कोमल और परिवर्तनशील होता है।पूरी राशि का सबसे ज्यादा सहानुभूति रखने वाला चिन्ह कर्क है, जिसका प्रतीक केकड़ा है।कर्क राशि के व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व जानिए 2. कर्क राशि वाले…
जन्म कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव दशम भाव होता है। दशम भाव पिता, व्यापार, उच्च नौकरी, राजनीति, राजसुख, प्रतिष्ठा, विश्वविख्याति का कारक भाव माना जाता है। इसे कर्म भाव भी कहते हैं। जातक अपने कर्म से महान विख्यात एवं यशस्वी भी होता है और अपने पिता का नाम रोशन करने वाला भी होता है। दशमेश…
जन्मपत्रिका में अष्टम भाव को मृत्यु का भाव कहा जाता है। मृत्यु का भाव होने के साथ ही यह भाव गूढ़ विद्या तथा अकस्मात धन प्राप्ति का भाव भी कहलाता है। जन्म कुंडली में अष्टम भाव जातकों का आयु भाव कहलाता है। यह भाव जातकों की दीर्घायु अथवा जीवन की अवधि को बताता है। ज्योतिष…
हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में एकादश भाव आमदनी और लाभ का भाव होता है। यह भाव व्यक्ति की कामना, आकांक्षा एवं इच्छापूर्ति को दर्शाता है। किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए प्रयासों में उसे कितना लाभ प्राप्त होगा, यह ग्यारहवें भाव से देखा जाता है। एकादश भाव लाभ, आय, प्राप्ति, सिद्धि, वैभव आदि को…
कुंडली में सप्तम भाव पति-पत्नी एवं व्यापर से सम्बंधित विषयो को दर्शाता है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी तथा पार्टनर के विषय का बोध कराता है। यह नैतिक, अनैतिक रिश्ते को भी दर्शाता है। शास्त्रों में मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। इनमें काम का…
कुंडली का चतुर्थ भाव जातक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह भाव जातक की माँ से सम्बंधित भाव है जब व्यक्ति का जन्म होता है तो जन्म के बाद उसकी देखभाल ठीक तरह से माँ ही कर पाती है जिससे उस व्यक्ति का आगे का आने वाला जीवन अच्छा हो सके।…
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