अंक ज्योतिष में 3 मूलांक का विशेष महत्व होता है. जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है तो उनका मूलांक 3 होगा. मूलांक 3 का स्वामी ग्रह बृहस्पति है, जो सभी ग्रहों के गुरु हैं. मूलांक 3 के लोग बहुत स्वाभिमानी होते हैं. इन लोगों…
वर्ष 2024 मीन राशि के जातकों के लिए मिलता-जुलता फल देने वाला रहेगा। इस वर्ष आप अपने कई निर्णय से सबको चौंका सकते हैं और आपका निर्णय सार्थक होंगे। इस वर्ष परिवार में चल रहे वाद विवाद लगभग खत्म होंगे। आपको अपने स्वभाव में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। वाणी का प्रयोग संभलकर करें। नहीं…
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य व्यक्ति को ऊर्जा और बल प्रदान करता है। जैसे कि सूर्य को राजा कहा जाता है इसी समान सूर्य का स्वभाव भी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस जातक की कुंडली में सूर्य अच्छी स्थिति में है उनके रहन सहन का तरीका…
कर्क राशि वाले जातकों का स्वामी चंद्रमा होता है, राशि चक्र का चौथा चिन्ह है। इसकी वजह से इनका स्वभाव भी चंद्र की तरह कोमल और परिवर्तनशील होता है।पूरी राशि का सबसे ज्यादा सहानुभूति रखने वाला चिन्ह कर्क है, जिसका प्रतीक केकड़ा है।कर्क राशि के व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व जानिए 2. कर्क राशि वाले…
जन्मपत्रिका में अष्टम भाव को मृत्यु का भाव कहा जाता है। मृत्यु का भाव होने के साथ ही यह भाव गूढ़ विद्या तथा अकस्मात धन प्राप्ति का भाव भी कहलाता है। जन्म कुंडली में अष्टम भाव जातकों का आयु भाव कहलाता है। यह भाव जातकों की दीर्घायु अथवा जीवन की अवधि को बताता है। ज्योतिष…
कुंडली में सप्तम भाव पति-पत्नी एवं व्यापर से सम्बंधित विषयो को दर्शाता है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी तथा पार्टनर के विषय का बोध कराता है। यह नैतिक, अनैतिक रिश्ते को भी दर्शाता है। शास्त्रों में मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। इनमें काम का…
कुंडली में पंचम भाव इमेजिनेशन, रोमांस और संतान से जुड़ा होता है। यह भाव आपके खुशियों का घर कहलाता है। इस भाव से जो खुशी मिलती है, वो अक्सर आपके रचनात्मक प्रयासों का प्रतिफल होती है। कुंडली के 5वें घर को लॉटरी, गम्ब्लिंग, पजल्स , कार्ड, शेयर, सट्टेबाजी और स्टॉक एक्सचेंज जैसे अवसरों के लिए…
कुंडली का चतुर्थ भाव जातक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह भाव जातक की माँ से सम्बंधित भाव है जब व्यक्ति का जन्म होता है तो जन्म के बाद उसकी देखभाल ठीक तरह से माँ ही कर पाती है जिससे उस व्यक्ति का आगे का आने वाला जीवन अच्छा हो सके।…
वैदिक ज्योतिष में शत्रु भाव ही छठे भाव के रूप में लोकप्रिय है। आपकी कुंडली के अन्य भागों की तरह ही यह भी बड़ा महत्व रखता है और यह अद्वितीय भी है। आमतौर पर इस भाव का संबंध आपके स्वास्थ्य और कल्याण से होता है। यही वजह है कि इसे रोग स्थान भी कहा जाता…
आज हम कुंडली के तीसरे भाव के बारे में जानेंगे। तृतीय भाव आपके साहस-पराक्रम, संवाद शैली, छोटे भाई बहनों के साथ आपके संबंधों के बारे में बताता है। आपका किसी भी काम को करने का तरीका भी इस भाव को देखकर पता चल जाता है। आइए जानते हैं कि तृतीय भाव का व्यक्ति के जीवन…
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