जन्मपत्रिका में अष्टम भाव को मृत्यु का भाव कहा जाता है। मृत्यु का भाव होने के साथ ही यह भाव गूढ़ विद्या तथा अकस्मात धन प्राप्ति का भाव भी कहलाता है। जन्म कुंडली में अष्टम भाव जातकों का आयु भाव कहलाता है। यह भाव जातकों की दीर्घायु अथवा जीवन की अवधि को बताता है। ज्योतिष…
हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में एकादश भाव आमदनी और लाभ का भाव होता है। यह भाव व्यक्ति की कामना, आकांक्षा एवं इच्छापूर्ति को दर्शाता है। किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए प्रयासों में उसे कितना लाभ प्राप्त होगा, यह ग्यारहवें भाव से देखा जाता है। एकादश भाव लाभ, आय, प्राप्ति, सिद्धि, वैभव आदि को…
कुंडली में सप्तम भाव पति-पत्नी एवं व्यापर से सम्बंधित विषयो को दर्शाता है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी तथा पार्टनर के विषय का बोध कराता है। यह नैतिक, अनैतिक रिश्ते को भी दर्शाता है। शास्त्रों में मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। इनमें काम का…
कुंडली में पंचम भाव इमेजिनेशन, रोमांस और संतान से जुड़ा होता है। यह भाव आपके खुशियों का घर कहलाता है। इस भाव से जो खुशी मिलती है, वो अक्सर आपके रचनात्मक प्रयासों का प्रतिफल होती है। कुंडली के 5वें घर को लॉटरी, गम्ब्लिंग, पजल्स , कार्ड, शेयर, सट्टेबाजी और स्टॉक एक्सचेंज जैसे अवसरों के लिए…
कुंडली का चतुर्थ भाव जातक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह भाव जातक की माँ से सम्बंधित भाव है जब व्यक्ति का जन्म होता है तो जन्म के बाद उसकी देखभाल ठीक तरह से माँ ही कर पाती है जिससे उस व्यक्ति का आगे का आने वाला जीवन अच्छा हो सके।…
वैदिक ज्योतिष में शत्रु भाव ही छठे भाव के रूप में लोकप्रिय है। आपकी कुंडली के अन्य भागों की तरह ही यह भी बड़ा महत्व रखता है और यह अद्वितीय भी है। आमतौर पर इस भाव का संबंध आपके स्वास्थ्य और कल्याण से होता है। यही वजह है कि इसे रोग स्थान भी कहा जाता…
आज हम कुंडली के तीसरे भाव के बारे में जानेंगे। तृतीय भाव आपके साहस-पराक्रम, संवाद शैली, छोटे भाई बहनों के साथ आपके संबंधों के बारे में बताता है। आपका किसी भी काम को करने का तरीका भी इस भाव को देखकर पता चल जाता है। आइए जानते हैं कि तृतीय भाव का व्यक्ति के जीवन…
ज्योतिष में हर भाव का अपना अलग महत्व होता है। इसलिए व्यक्ति के बारे में संपूर्ण जानकारी देने से पहले ज्योतिषी हर भाव पर दृष्टि डालता है। अपने पिछले Video में हमने आपको प्रथम भाव के बारे में जानकारी दी थी। आज अपने इस Video में हम आपको बताएंगे कि ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के…
जन्म पत्रिका एवं भाव आकाश को बारह भागों में बाँटा गया है। आकाश के नक्शे को जन्म पत्रिका कहते हैं। इस प्रकार जन्म पत्रिका के वह भी 12 भाग होते हैं। इन भागों को भाव कहते हैं। इल बारह भागों में जो ग्रह जिस समय जहां स्थित होता है, जन्म पत्रिका में उस जगह के…
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