कर्क राशि वाले जातकों का स्वामी चंद्रमा होता है, राशि चक्र का चौथा चिन्ह है। इसकी वजह से इनका स्वभाव भी चंद्र की तरह कोमल और परिवर्तनशील होता है।पूरी राशि का सबसे ज्यादा सहानुभूति रखने वाला चिन्ह कर्क है, जिसका प्रतीक केकड़ा है।कर्क राशि के व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व जानिए 2. कर्क राशि वाले…
इजराइल और फिलिस्तीनी संगठन हमास के बीच जिस तरह संघर्ष जारी है और दोनों तरफ से बड़े हमले हो रहे हैं, उसे देखते हुए लोगों को डर सता रहा है कि कहीं यह यूक्रेन-रूस युद्ध जैसा लंबा न खिंच जाए. जानें इस जंग में किसका पलड़ा रहेगा भारी और किसे झेलना पड़ेगा बड़ा नुकसान इजराइल…
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में नवम भाव व्यक्ति के भाग्य को दर्शाता है और इसलिए इसे भाग्य का भाव कहा जाता है। जिस व्यक्ति का नवम भाव अच्छा होता है वह व्यक्ति भाग्यवान होता है। इसके साथ ही नवम भाव से व्यक्ति के धार्मिक दृष्टिकोण का पता चलता है। गुरू नवम स्थान का…
जन्म कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव दशम भाव होता है। दशम भाव पिता, व्यापार, उच्च नौकरी, राजनीति, राजसुख, प्रतिष्ठा, विश्वविख्याति का कारक भाव माना जाता है। इसे कर्म भाव भी कहते हैं। जातक अपने कर्म से महान विख्यात एवं यशस्वी भी होता है और अपने पिता का नाम रोशन करने वाला भी होता है। दशमेश…
जन्मपत्रिका में अष्टम भाव को मृत्यु का भाव कहा जाता है। मृत्यु का भाव होने के साथ ही यह भाव गूढ़ विद्या तथा अकस्मात धन प्राप्ति का भाव भी कहलाता है। जन्म कुंडली में अष्टम भाव जातकों का आयु भाव कहलाता है। यह भाव जातकों की दीर्घायु अथवा जीवन की अवधि को बताता है। ज्योतिष…
हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में एकादश भाव आमदनी और लाभ का भाव होता है। यह भाव व्यक्ति की कामना, आकांक्षा एवं इच्छापूर्ति को दर्शाता है। किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए प्रयासों में उसे कितना लाभ प्राप्त होगा, यह ग्यारहवें भाव से देखा जाता है। एकादश भाव लाभ, आय, प्राप्ति, सिद्धि, वैभव आदि को…
कुंडली में सप्तम भाव पति-पत्नी एवं व्यापर से सम्बंधित विषयो को दर्शाता है। जन्म कुंडली में सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी तथा पार्टनर के विषय का बोध कराता है। यह नैतिक, अनैतिक रिश्ते को भी दर्शाता है। शास्त्रों में मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। इनमें काम का…
कुंडली में पंचम भाव इमेजिनेशन, रोमांस और संतान से जुड़ा होता है। यह भाव आपके खुशियों का घर कहलाता है। इस भाव से जो खुशी मिलती है, वो अक्सर आपके रचनात्मक प्रयासों का प्रतिफल होती है। कुंडली के 5वें घर को लॉटरी, गम्ब्लिंग, पजल्स , कार्ड, शेयर, सट्टेबाजी और स्टॉक एक्सचेंज जैसे अवसरों के लिए…
कुंडली का चतुर्थ भाव जातक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह भाव जातक की माँ से सम्बंधित भाव है जब व्यक्ति का जन्म होता है तो जन्म के बाद उसकी देखभाल ठीक तरह से माँ ही कर पाती है जिससे उस व्यक्ति का आगे का आने वाला जीवन अच्छा हो सके।…
वैदिक ज्योतिष में शत्रु भाव ही छठे भाव के रूप में लोकप्रिय है। आपकी कुंडली के अन्य भागों की तरह ही यह भी बड़ा महत्व रखता है और यह अद्वितीय भी है। आमतौर पर इस भाव का संबंध आपके स्वास्थ्य और कल्याण से होता है। यही वजह है कि इसे रोग स्थान भी कहा जाता…
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